इंटरनेट की खोज किसने की?

Related

DRDO Recruitment 2021: अपरेंटिस ट्रेनी पदों के लिए वैकेंसी, जल्द करे आवेदन

DRDO Recruitment 2021: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन, DRDO...

CTET 2021: आवेदन की अंतिम तिथि 25 अक्टूबर तक बढ़ाई गई, जानिए संशोधित पात्रता मानदंड

CTET 2021: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, सीबीएसई ने सीटीईटी...

Share

इंटरनेट की खोज किसने की? / Internet Ki Khoj Kisne Ki

इंटरनेट की खोज किसने की? / Internet Ki Khoj Kisne Ki: विंट सेर्फ़ (Vint Cerf) व बॉब खान (Bob Khan) / (Robert Elliot Kahn) द्वारा इंटरनेट की खोज की गयी थी। इसलिए इन दोनों को इंटरनेट के जनक के नाम से संभोधित किया जाता है। पहली बार इन दोनों ने ऐसे नेटवर्क के ऊपर काम करना चालू किया था। जिसे आज के वक्त में हम इंटरनेट कहते है। सन 1978 में इन दोनों के प्रयासों से Transmission Control Protocol और Internet Protocol की संरचना हुई। TCP/IP नाम से भी जिसे जाना जाता है।

तो अगर आपके मन में भी Internet के खोजकर्ता के बारे में जानने या उससे जुड़ी कुछ जानकारी के बारे में जानने की इच्छा है। तो इस आर्टिकल इंटरनेट की खोज किसने की / Internet Ki Khoj Kisne Ki को पूरा जरूर पढ़े।

यह भी पढ़ें – फेसबुक क्या है, फेसबुक का आविष्कार किसने किया

यह भी पढ़ें – व्हाट्सएप्प का आविष्कार किसने किया

इंटरनेट की खोज किसने की? / Internet Ki Khoj Kisne Ki

  • इंटरनेट क्या है? 
  • इन्टरनेट का हिंदी अर्थ 
  • इंटरनेट का फुल फॉर्म क्या है?
  • इन्टरनेट का मालिक कौन है? 
  • इंटरनेट का आविष्कार किसने किया? 
  • इंटरनेट का जनक कौन है?  
  • भारत में इन्टरनेट कब आया? 
  • इन्टरनेट की पहली वेबसाइट कौन थी? / इन्टरनेट की पहली वेबसाइट का नाम
  • इन्टरनेट कैसे काम करता है? 
  • इन्टरनेट के प्रकार
    इंट्रानेट 
    एक्सट्रानेट 
  • Internet, Intranet और Extranet में अंतर
  • इन्टरनेट के फायदे और नुकसान
  • इन्टरनेट के लाभ 
  • इन्टरनेट के नुकसान 
  • इंटरनेट का उपयोग 
  • सवाल – जवाब
  • इंटरनेट से जुड़े रोचक तथ्य
  • निष्कर्ष

इंटरनेट की खोज किसने की? / Internet Ki Khoj Kisne Ki

इंटरनेट आख़िर क्या है? / Internet Kya Hai?

इन्टरनेट को लेकर लोगों के मन में काफ़ी सारी गलत धारणा महजूद है। इसलिए सभी को साफ़ करने की ज़रूरत है। बता दे की इंटरनेट कोई वेब नहीं है। और न ही एक क्लाउड है।

तो फिर इंटरनेट क्या है?

आपको सुनने में भले ही साधारण-सा लगे। पर काफ़ी सारी प्रक्रिया इंटरनेट (Internet) के पीछे चलती है। तभी जाकर हम लोगो को इन्टरनेट की सेवा प्राप्त होती है। इंटनेट हमारे मोबाइल में आसानी से चलता है। और इसी वजह से शायद हमने कभी इसे उतना महत्व नहीं दिया है। तो आइये जानते है इन्टरनेट आख़िर है में क्या है —

इंटरनेट क्या है? / Internet Kya Hai?

इंटरनेट एक- दुसरे से जुड़े कई कंप्यूटरों (Computers) का जाल है। जो विश्व के किसी भी Computer को राउटर एवं सर्वर के माध्यम से आपस में जोड़ता है। अगर दूसरे शब्दों में कहा जाए तो सूचनाओ के आदान प्रदान करने के लिए TCP (Transmission Control Protocol)/IP (Internet Protocol) के माध्यम से दो कंप्यूटरों के बीच स्थापित सम्बन्ध को इंटरनेट कहते हैं। विश्व का सबसे बड़ा नेटवर्क इंटरनेट है।

इन्टरनेट का हिंदी अर्थ / Internet Ka Hindi Arth

वैसे तो इन्टरनेट एक अंग्रेजी शब्द है। जो अंग्रेजी के एक और शब्द Internetworked से लिया गया है। इन्टरनेट का हिंदी में मतलब होता है अंतरजाल। Internet हजारों-लाखों कम्प्यूटरों का एक जाल है। जिसे हिंदी भाषा में अंतरजाल (Antarjaal) या फिर सामान्य भाषा में महाजाल कहा जा सकता है।

विश्व में इंटरनेट (Internet) के आविष्कार ने एक क्रांति ला कर रख दी है। आज के समय में इन्टरनेट इतना जरूरी हो गया है। की अगर इंटरनेट सेवा को 1 मिनट के लिए भी बंद कर दिया जाए तो इससे लाखो-करोड़ो का नुक़सान हो जाता है। बहुत कुछ आज के समय में इंटरनेट के उपर ही निर्भर है। वैसे तो यह एक इनफार्मेशन लेने की टेक्नोलॉजी है। जिससे हम घर बैठे बहुत सी जानकारी प्राप्त कर सकते है।

इन्टरनेट विश्वभर के लाखो करोडो कंप्यूटर से जुड़ा होता है। इंटरनेट लाखो करोड़ो लोगो को आपस में जोड़े रखता है। दुनिया भर में इंटरनेट से बहुत सा डाटा का आदान प्रदान होता है।

इंटरनेशनल लेवल नेटवर्क के उपर इंटरनेट काम करता है। जिससे विश्वभर के सभी यूजर को एक साथ जोड़े रखता है। इन्टरनेट के लिए वर्ल्ड वाइड वेब को सबसे जरूरी साधन माना जाता है। क्योकि इन्टरनेट का इसके बिना अच्छी तरह से इस्तेमाल नही कर सकते है। अगर आप कोई जानकारी इन्टरनेट से लेना चाहते है। तो वर्ल्ड वाइड वेब की आवश्यकता तो पड़ेगी ही। कोई जानकारी इसके बिना नही मिल सकती है।

इन्टरनेट के अंदर प्रवेश करने के वेब ब्राउज़र की आवश्यकता पड़ती है। इंटरनेट का इस्तेमाल वेब ब्राउज़र के बिना नहीं किया जा सकता है। वेब ब्राउज़र एक सॉफ्टवेयर होता है। जिसका उपयोग करके इंटरनेट का इस्तेमाल किया जाता है। दिन-ब-दिन इन्टरनेट का इस्तेमाल बढ़ता ही जा रहा है।

इंटरनेट का फुल फॉर्म क्या है? / Internet Ka Full Form Kya Hai?

इंटरनेट का फुल फॉर्म इंटरकनेक्टेड नेटवर्क (Interconnected Network) है। यह सभी वेब सर्वर वर्ल्डवाइड (Web Servers Worldwide ) का एक बहुत बड़ा नेटवर्क होता है। इसलिए बहुत सी जगहों में इसे वर्ल्ड वाइड वेब या सिम्पली Web भी कहा जाता है।

इन्टरनेट का मालिक कौन है? / Internet Ka Malik Kon Hai?

हर किसी-न- किसी चीज का कोई-न-कोई मालिक जरूर होता है। पर यदि इंटरनेट के मालिक की बात की जाए तो किसी एक को इसका श्रेय देना ठीक नहीं होगा।

सन 1989 में Berners-Lee ने वर्ल्ड वाइड वेब की खोज की। यही वह प्लेटफार्म है। जिसका उपयोग आज हम इन्टरनेट का इस्तेमाल करने के लिए कर रहे है।

इसलिए देखा जाए तो इंटरनेट के आविष्कार का श्रेय एक को देना उचित नहीं होगा। क्योकि इन सभी का इसमें अपना-अपना योगदान रहा है। इंटरनेट आज जैसा है यह सब उन महान लोगों की कड़ी मेहनत की देन है।

इन्टरनेट की खोज किसने की? / इन्टरनेट की खोज की कहानी / Internet Ki Khoj Kisne Ki

इन्टरनेट (Internet) की खोज के पीछे बहुत सारे लोगो का हाथ रहा है। शीत युद्ध के दौरान अमेरिकी रक्षा विभाग को एक नयी तकनीक से लैस करने की योजना लियोनार्ड क्लेरॉक (Leonard Kleinrock) ने बनायीं। योजना के मुताबिक कई Computers को आपस में जोड़ कर सूचनाओं का आदान प्रदान करना था। जिससे बहुत जल्दी सेना को जरुरी जानकारी प्राप्त हो जाए।

इस नेटवर्क को बनाने में एम.आई.टी. के वैज्ञानिक J.C.R. Licklider और रोबर्ट टेलर (Robert Taylor) ने उनका साथ दिया। सन 1962 में जिन्होंने कंप्यूटर का एक “Galactic Network” बनाने का प्रताव रखा। जिस पर काम लगातार होता रहा है।

एक और एम.आई.टी. वैज्ञानिक (MIT Scientist) ने 1965 में एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर तक जानकारी भेजने का एक तरीका विकसित किया। जिसे Packet Switching का नाम दिया गया। डाटा को Packet Switching ब्लाक या पैकेट में तोड़ कर Data ट्रान्सफर करता था।

सबसे पहले इस तकनीक की शुरुआत संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा विभाग की ARPA (Advance Research Projects Agency) द्वारा की गई थी। जिस कारण इसे ARPANET का नाम दिया गया। ARPANET में एक Computer से दूसरे Computer को जोड़ने के लिए NCP (Network Control Protocol) का इस्तेमाल किया गया था।

ARPAnet के माध्यम से 29 अक्टूबर 1969 को पहला सन्देश “LOGIN (लॉगिन)” लिख कर भेजा गया। जो आंशिक रूप से सफल हुआ।

ARPAnet से 1969 के अंत तक केवल चार कंप्यूटर जुड़े थे। पर यह नेटवर्क 1970 के दौरान लगातार बढ़ता गया। इसने 1971 में University of Hawaii के ALOHAnet को जोड़ा। उसके बाद लंदन के University College और नॉर्वे के रॉयल रडार प्रतिष्ठान में नेटवर्क को 2 साल बाद जोड़ा गया।

इस नेटवर्क से जैसे ही बहुत सारे कंप्यूटर जुड़ते गए। तो इसे एकीकृत करना वैश्विक स्तर पर कठिन होता चला गया। उसके बाद जैसे जैसे इसके फायदों के बारे में पता चलता गया वैसे वैसे ही इसका उपयोग भी बढता गया।

इंटरनेट का आविष्कार किसने किया? / Internet Ka Aavishkaar Kisne Kiya?

सबसे पहले सन 1969 में DOD / Department of Defense (डिपार्टमेंट ऑफ़ डिफेन्स) द्वारा इन्टरनेट का आविष्कार किया गया था। इंटरनेट की संरचना अमेरिकी रक्षा विभाग के द्वारा UCLA और स्टैनफोर्ड अनुसंधान संस्थान (Stanford Research Institute) कंप्यूटर्स का Networking करके की गई। सूचना का आदान प्रदान करने के लिए Internet पर जिस नियम का उपयोग होता है। उसे TCP / Transmission Control Protocol (ट्रांसमिशन कण्ट्रोल प्रोटोकॉल) या IP/ Internet Protocol (इन्टरनेट प्रोटोकॉल) कहते है। सन , 1979′ में ब्रिटिश डाकघर ने पहला अंतरराष्ट्रीय कंप्यूटर नेटवर्क बनाकर नये प्रौद्योगिकी का उपयोग करना शुरू किया।

इस नेटवर्क को बाद में ARPN/Advance Research Project in Agency (एडवांस रिसर्च प्रोजेक्ट इन एजेंसी ) द्वारा करीब 1980 में लॉन्च किया गया। सन ,1980 में ही आईबीएम के कंप्यूटर्स पर एक Microsoft operating system लगाने के लिए बिल गेट्स का सौदा हुआ। इन्टरनेट का सही से उपयोग करने के लिए एप्पल ने पहली बार 1984 में फ़ाइलों और फ़ोल्डरों, ड्रॉप डाउन मेनू (Drop Down Menu), Mouse, Graphics का उपयोग आदि से युक्त “एक आधुनिक सफल कम्प्यूटर” लांच किया।

Intenet का सबसे अधिक और आसानी से उपयोग उस समय होने लगा जब टिम बेर्नर ली ने 1989 में इंटरनेट पर संचार को सरल बनाने के लिए ब्राउज़रों, पन्नों और लिंक का इस्तेमाल करके World Wide Web बनाया। गूगल के सन 1998 में आने के बाद इंटरनेट का चेहरा ही बदल गया। जिससे आज हम अच्छी तरह वाकिफ है।

इसके अलावा एक रिपोर्ट के अनुसार इंटरनेट की स्पीड तेज होने पर वर्ष भर मे एक परिवार इंटरनेट पर होने वाले खर्च में से करीब 5 लाख रुपये बचा सकता है। इसमें सबसे अधिक पैसा ऑन लाइन डील, डेली सर्च, एंटरटेनमेंट और ट्रैवल में उपयोग होने वाले इंटरनेट के रूप में बचा सकता है। तुर्केमेनिस्तान में इंटरनेट की सबसे महंगी सेवा है।

सन 1989 में Berners-Lee ने वर्ल्ड वाइड वेब की खोज की। यही वह प्लेटफार्म है। जिसका उपयोग आज हम इन्टरनेट का इस्तेमाल करने के लिए कर रहे है।

इसलिए देखा जाए तो इंटरनेट के आविष्कार का श्रेय एक को देना उचित नहीं होगा। क्योकि इन सभी का इसमें अपना-अपना योगदान रहा है। इंटरनेट आज जैसा है यह सब उन महान लोगों की कड़ी मेहनत की देन है।

इंटरनेट का जनक कौन है?  / Who Is Fathers Of The Internet?

विंटन सेर्फ नाम के एक कंप्यूटर वैज्ञानिक ने 1970 के दशक के अंत तक विश्व के सभी मिनी-नेटवर्कों पर एक-दूसरे के साथ संवाद करने के लिए एक तरीका सभी कंप्यूटरों के लिए विकसित करके इस समस्या को हल करना शुरू कर दिया था। विंटन सेर्फ ने ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल” या TCP अपने आविष्कार को नाम दिया।

बाद में विंटन सेर्फ ने एक अतिरिक्त प्रोटोकॉल IP (इंटरनेट प्रोटोकॉल) जोड़ा। जिस इन्टरनेट का आज हम इस्तेमाल करते है। उसमे TCP/IP Protocol का ही उपयोग किया जाता है।

विंट सर्फ (Vint Cerf) और रोबर्ट ई. काहन (Robert E. Kahn) ने सन 1974 में एक पेपर प्रकाशित किया। जिसे “The Fathers Of The Internet” (इंटरनेट का जनक) के नाम से जाना गया। इसी रिसर्च पेपर को प्रकाशित करने की वजह से Vint Cerf व Robert E. Kahn को इन्टरनेट का जनक कहा जाता है।

भारत में इन्टरनेट कब आया? / Bharat Me Internet Kab Aaya?

14 अगस्त 1995 को भारत (India) में Internet की शुरुआत हो गयी थी। पर 15 अगस्त 1995 को सार्वजानिक रूप से विदेश संचार निगम लिमिटेड” यानि VSNL द्वारा चालू किया गया था। तभी से इन्टरनेट का इस्तेमाल महत्वपूर्ण सूचनाओं का आदान प्रदान करने के लिए किया गया था। जिसकी स्पीड मात्र 8-10 kbps थी।

Internet की शुरुआत जब India में हुई थी। तब केवल 20-30 Computers ही जुड़े थे। साथ ही इन्टरनेट कनेक्शन का खर्च भी बहुत अधिक था। लगभग 500-600 रूपये 9-10 kbps स्पीड के इन्टरनेट का मासिक खर्चा था। जो की उस समय के अनुसार बहुत ही ज्यादा था। जबकि आज के वक्त में प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में इन्टरनेट पहुँच चूका है।

इन्टरनेट की पहली वेबसाइट कौन थी? / इन्टरनेट की पहली वेबसाइट का नाम

6 अगस्त 1991 को इन्टरनेट पर पहला वेब पेज लाइव हुआ था। यह वेब पेज वर्ल्ड वाइड वेब प्रोजेक्ट की जानकारी के लिए समर्पित था। जिसे टिम बर्नर्स-ली (Berners-Lee) द्वारा बनाया गया था।

पहले वेब पेज का एड्रेस -http://info.cern.ch/hypertext/WWW/TheProject.html

यह अभी भी लाइव है।

इन्टरनेट कैसे काम करता है? / Internet Kaise Kaam Karta hai?

अगर आप सोच रहे है की इंटरनेट सेटेलाईट के माध्यम से चलता है। तो आप बिलकुल गलत सोच रहे है। हालाँकि सेटेलाईट के मध्यम से भी इन्टरनेट को चलाया जाता है। पर जिस इन्टरनेट का हम इस्तेमाल करते है। वह सेटेलाइट से नहीं बल्कि Opticle Fibres Cable द्वारा हम तक पहुँचता है। इसे सबमरीन केबल भी कहा जाता है।

जिस इन्टरनेट का हम इस्तेमाल करते है। वो 3 कम्पनियों के माध्यम से हम तक पहुँचती है। तीन भाग में हम इन तीनों कंपनियों को विजभित कर लेते है।

Tier 1
Tier 2
Tier 3

Tier 1

इसमें वह कंपनी है। जिन्होंने समुद्र के अन्दर से पूरे विश्व भर में ऑप्टिकल फाइबर केबल का नेटवर्क फैला रखा है। इन्ही केबल की वजह से विश्व के सारे सर्वर (Servers) एक दूसरे से कनेक्ट रहते है।

Tier 2

इसमें टेलिकॉम कंपनियां जैसे – Idea, Vodafone, Airtel जैसी कम्पनिया आती है। जिनके माध्यम से हम तक इन्टरनेट पहुँचता है।

Tier 3

इसमें Local Area की छोटी छोटी कंपनिया होती है। Tier 2 से Tier 3 कि कम्पनियाँ Data खरीदती है। और Tier 1 की कंपनी से Tier 2 प्रति GB के हिसाब से डाटा खरीदती है। और हम लोग डाटा Tier 2 की कंपनियों से खरीदते है।

Tier 2 की कम्पनियाँ landline, optical fiber cables द्वारा अपने टावर को Tier 1 से कनेक्ट करके रखती है। इन्टरनेट कि सेवा वायरलेस नेटवर्क के माध्यम से हम तक पहुँचती है।

इन्टरनेट के प्रकार – Internet Ke Prakar

जिस इन्टरनेट का हम अभी इस्तेमाल रहे है। वह एक प्रकार का सार्वजनिक नेटवर्क है। जिसका इस्तेमाल ई कोई भी कभी भी कर सकता है। केवल इसके लिए नेटवर्क व डाटा कि जरूरता पड़ती है।

लेकिन क्या आपको पता है इसके अतिरिक्त भी इन्टरनेट के कई प्रकार होते है। यदि नहीं तो आइये जानते है आखिर इन्टरनेट कितने प्रकार का होता है।

Intranet और Extranet यह दोनों भी इन्टरनेट के ही एक प्रकार है। बहुत से कम लोगो को ही इसके बारे में जानकारी होगी। तो चलिये जानते इंट्रानेट और एक्सट्रानेट के बारे में –

इंट्रानेट – Intranet Kya hai?

इन्टरनेट की ही तरह ही इंट्रानेट भी कई कंप्यूटरों का नेटवर्क होता है। पर इंट्रानेट इन्टरनेट से थोडा भिन्न है। क्योकि जिस इन्टरनेट का आज हम इस्तेमाल कर रहे है। वह एक सार्वजानिक नेटवर्क होता है। वही इंट्रानेट प्राइवेट नेटवर्क होता है। जो इंटरनेट की ही तरह TCP/IP के माध्यम से डेटा और एप्लीकेशन को इंट्रानेट रूप से शेयर करता है।

इस प्रकार के नेटवर्क में लोकल एरिया (LAN) के कई नेटवर्क आपस में जुड़े हुए हो सकते है। और लीज्ड लाइन्स का वाइड एरिया नेटवर्क में भी उपयोग हो सकता हैं।

इन्टरनेट की ही तरह ही इंट्रानेट (Intranet) आपस में जुड़े कई कंप्यूटरों का जाल होता है। पर इंट्रानेट नेटवर्क प्राइवेट होता है। सार्वजानिक रूप से हर कोई इसका इस्तेमाल नहीं कर सकता है।

कंपनी इस तरह के नेटवर्क का इस्तेमाल करके एक ऑफिस को दूसरे ऑफिस से कनेक्ट रखती है। जिसे एक्सेस करने के लिए यूजर, पासवर्ड का इस्तेमाल किया जाता है। कोई भी इसको बिना यूजर पासवर्ड के एक्सेस नहीं कर सकता है।

एक्सट्रानेट – Extranet Kya Hai?

Extranet इन्टरनेट से इंट्रानेट में जाने की प्रक्रिया कहलाती है। Extranet एक प्राइवेट नेटवर्क है। जो पब्लिक नेटवर्क की मदद से डाटा प्रदान करता है। एक माध्यम की तरह यह कंपनी और व्यापारिक साझेदारों के बीच काम करता है। यह कंपनी की एक शाखा को दूर स्थित दूसरी शाखा को आपस में जोड़ कर डाटा शेयरिंग करने कि परमिशन देता है।

इसको एक्सेस करने के लिए यूजर व पासवर्ड की जरूरत पड़ती है। Intranet (इंट्रानेट) का यह एक हिस्सा है। एक से अधिक संस्थाओं द्वारा इसका प्रबंधन किया जाता है।

Internet, Intranet और Extranet में अंतर

Internet एक पब्लिक नेटवर्क है। दुनिया का कोई भी व्यक्ति इसे चला सकता है। जबकि Intranet एक प्राइवेट नेटवर्क है। इसका इस्तेमाल कंपनी या संस्थाएं अपनी निजी जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए करती है। और वही Extranet भी एक प्राइवेट नेटवर्क है। यह पब्लिक नेटवर्क की मदद से डाटा शेयर करने में माध्यम का काम करता है।

Internet को चलाने के लिए किसी यूजर पासवर्ड कि जरूरत नहीं होती है। जबकि Intranet को चलाने के लिए यूजर पासवर्ड कि जरूरत होती है। और वही Intranet कि ही तरह Extranet को भी चलाने के लिए यूजर पासवर्ड कि आवश्यकता होती है।

सामान्य व्यक्ति भी Internet का उपयोग कर सकता है। जबकि Intranet केवल एक संस्थान द्वारा चलाया जाता है। वही Extranet का इस्तेमाल दो या दो से अधिक संस्थाओं के बीच डाटा साझा करने के लिए होता है।

Internet में बहुत सारे कम्प्यूटर्स का नेटवर्क होता है। जबकि Intranet सिर्फ एक ही संस्थान के कंप्यूटरों का नेटवर्क होता है। तो वही Extranet में दो या दो से अधिक संस्थानों के Computer आपस में कनेक्ट होते है।

Internet की सिक्योरिटी यूजर द्वारा उपयोग की जाने वाली डिवाइस पर निर्भर होती है। जबकि Intranet कि सिक्योरिटी फायरवाल पर निर्भर करती है। तो वही Extranet की सिक्योरिटी Internet और Intranet के फायरवाल पर निर्भर करती है।

इन्टरनेट के फायदे और नुकसान

इंसानों के लिए आज इन्टरनेट वरदान साबित हो रहा है। अगर इसके सकारात्मक पहलु है तो वही दूसरी और नकारात्मक पहलु भी है। तो चलिए जानते है इन्टरनेट के फायदे और नुकसान के बारे में –

इन्टरनेट के लाभ / Internet Ke Labh

हम घर बैठे किसी भी जानकारी को इन्टरनेट के माध्यम प्राप्त कर सकते है।
हम घर बैठे बहुत से व्यावसायिक कार्य भी कर सकते है।
इन्टरनेट की सहायता से घर बैठे मूवी, कॉमेडी आदि घर बैठे देख सकते है। घर बैठे अपना टाइम पास या मनोरंजन कर सकते है।
इन्टरनेट के माध्यम से कोई भी जानकारी हासिल कर सकते है। चाहे वो पढ़ाई से समबन्धित हो या फिर बिज़नेस से।
हम अपनी बात को मिनटों में एक-दूसरे तक आसानी से पंहुचा सकते है।
साथ ही इंटरनेट के माध्यम से टिकट बुकिंग, ऑनलाइन बुकिंग जैसे सुविधाओं का घर बैठे लाभ उठा सकते है। साथ ही घर बैठे रिचार्ज भी कर सकते है।

इन्टरनेट के नुकसान / Internet Ke Nukshaan

इन्टरनेट का इस्तेमाल बहुत से लोग भ्रामक और गलत जानकारियां फ़ैलाने के लिए भी करते है।

इन्टरनेट के माध्यम से लोगों कि जानकारियाँ चुरा कर उनका गलत इस्तेमाल कर किया जा सकता है।

इन्टरनेट के कारण बहुत से लोग, बच्चे गलत आदतों का शिकार हो जाते है। वे गलत संगतियो में पड़ जाते है। जिसमे अश्लील कंटेंट मानसिकता पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।

इन्टरनेट के कारण बहुमूल्य समय भी बर्बाद होता है। अगर आप इसका इस्तेमाल केवल टाइम पास के लिए करते है तो।

इन्टरनेट का इस्तेमाल फ्रॉड को अंजाम देने के लिए बहुत से लोगो द्वारा बहुत किया जा रहा है। जिसके कारण कई लोगो को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।

इन्टरनेट का अधिक इस्तेमाल सेहत के लिए बहुत हानिकारक है।

इन्टरनेट के कारण पर्सनल डाटा चोरी होने का भी डर बना रहता है। किसी भी समय नुकसान होने की संभावना बनी रहती है।

इंटरनेट का उपयोग / Internet Ka Upyog

आज इंटरनेट का इस्तेमाल सीमित न होकर असीमित हो चूका है। इन्टरनेट प्रारंभिक दौर में बहुत ही अधिक सीमित था। और उस वक्त इसका इस्तेमाल वैज्ञानिक और रक्षा विभाग से सम्बंधित काम कि सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए ही किया जाता था।

पर जैसे -जैसे आम आदमी तक इंटरनेट पंहुचा। इसके उपयोग का दायरा भी बढ़ता गया। आज इंटरनेट का इस्तेमाल असीमित क्षेत्रों में होने लगा। साथ ही इन्टरनेट हमारे दैनिक जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है। आज इसका इस्तेमाल कई चीजों में होना लगा है।

जैसे :

मनोरंजन
बैंकिंग
मेल
शॉपिंग के लिए
समाचार पढ़ने
बिल भरने
बिज़नेस मार्केटिंग के लिए
अपनों से जुड़े रहने के लिए
किसी भी तरह की इनफार्मेशन के लिए इत्यादि।

सवाल – जवाब / Sawal-Jawab

  1. इन्टरनेट क्या है?
    Internet एक- दुसरे से जुड़े कई कंप्यूटरों का जाल है। जो दुनिया के किसी भी कंप्यूटर को राउटर एवं सर्वर के माध्यम से आपस में जोड़ता है।
  2. इन्टरनेट को हिंदी में क्या कहते है?
    इन्टरनेट को हिंदी में “अंतरजाल” कहा जाता है।
  3. इन्टरनेट का मालिक कौन है?
    इन्टरनेट का कोई एक मालिक नहीं है।
  4. इन्टरनेट का जनक कौन है?
    विंट सेर्फ़ (Vint Cerf) व बॉब खान (Bob Khan) / (Robert Elliot Kahn) द्वारा इंटरनेट की खोज की गयी थी। इसलिए इन दोनों को इंटरनेट के जनक के नाम से संभोधित किया जाता है।
  5. भारत में इन्टरनेट कब आया था?
    80 के दशक मे भारत में इन्टरनेट आया।
  6. इन्टरनेट की पहली वेबसाइट कौन सी थी?
    6 अगस्त 1991 को इन्टरनेट पर पहला वेब पेज लाइव हुआ था। यह वेब पेज वर्ल्ड वाइड वेब प्रोजेक्ट की जानकारी के लिए समर्पित था। जिसे टिम बर्नर्स-ली (Berners-Lee) द्वारा बनाया गया था।
    पहले वेब पेज का एड्रेस -http://info.cern.ch/hypertext/WWW/TheProject.html
  7. इन्टरनेट का पुराना नाम क्या है?
    इन्टरनेटिंग प्रोजेक्ट इन्टरनेट का पुराना नाम है।
  8. इंटरनेट का पहली बार कब प्रयोग हुआ?
    ARPAnet के माध्यम से 29 अक्टूबर 1969 को पहला सन्देश “LOGIN (लॉगिन)” लिख कर भेजा गया। जो आंशिक रूप से सफल हुआ।
  9. इंटरनेट की खोज किसने की थी?
    1969 में DOD (डिपार्टमेंट ऑफ़ डिफेन्स) द्वारा सबसे पहले इन्टरनेट का आविष्कार किया गया था।
  10. भारत में इंटरनेट कब शुरू हुआ था?
    भारत में इंटरनेट पहली बार 14 अगस्त 1995 में आया । भारत में इंटरनेट पहली बार विदेश संचार निगम लिमिटेड द्वारा लाया गया था। भारत में 14 अगस्त 1995 को इंटनेट की शुरुवात हुई। हालाँकि इसे 15 अगस्त के दिन शुरू किया गया था।
  11. भारत में इंटरनेट की शुरुआत कहाँ हुई थी?
    इंटरनेट की शुरुआत भारत में कोलकाता में हुई थी। यहाँ पर सबसे पहले इंटरनेट का इस्तेमाल किया गया।
  12. भारत में इंटरनेट का इस्तमाल कब शुरू किया गया था?
    देश में पहली बार इंटरनेट का इस्तेमाल 15 अगस्त 1995 में हुआ था।

इंटरनेट से जुड़े रोचक तथ्य

क्या आप जानते है?

  • जिस Internet का हम उपयोग करते है। वह पुरे Internet का केवल 5% हिस्सा ही है।
    इन्टरनेट पूरी तरह से मुफ्त है। लेकिन हम जो चार्ज देते है। वह मेंटिनेंस का खर्चा होता है।
  • सन् 1971 में विश्व का पहला E-Mail America के कैंब्रिज (Cambridge) नामक स्थान पर रे टॉमलिंसन (Ray Tomlinson) नामक इंजीनियर ने एक ही कमरे में रखे दो कंप्यूटरों के बीच भेजा था।
  • क्रीपर दुनिया का सबसे पहला वायरस था। अरपानेट पर जिसे खोजा गया था। इंटरनेट से पहले सन 1970 की शुरुआत में यह आया थ।
  • पहले ईमेल www (world wide web) से बनाया गया था।
  • इन्टरनेट का इस्तेमाल दुनिया कि कुल 40% आबादी ही करती है।
  • VSNL ने भारत में इंटरनेट की शुरुआत 15 august 1995 में कि थी।
  • इंटरनेट का उपयोग लगभग 3.2 अरब लोग करते हैं। जिनमे 1.7 अरब इंटरनेट उपयोगकर्ता एशियाई हैं।
  • इंटरनेट से प्रति मिनट लगभग 204 मिलियन ईमेल भेजे जाते है। जिसमे 70% स्पैम होते है।
  • 2 अरब (Two Billion) इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता एक ईमेल उत्पन्न करने के लिए होती है।
  • हर दिन लगभग 100,000 से अधिक नए डॉट कॉम डोमेन वेब पर पंजीकृत होते है।
  • 1993 के अंत तक, केवल 623 वेबसाइटें World Wide Web पर थीं।
  • 2010 में, फिनलैंड दुनिया में पहला देश बन गया। जिसने Internet access को लीगल राइट बनाया।
  • संयुक्त राष्ट्र के अनुसार इंटरनेट से लोगों को डिस्कनेक्ट करना मानवाधिकार उल्लंघन है।
  • Internet से लोगों को Disconnect करना संयुक्त राष्ट्र के अनुसार मानवाधिकार उल्लंघन है।

निष्कर्ष

Information And Knowledge की इस पोस्ट इंटरनेट की खोज किसने की / Internet Ki Khoj Kisne Ki में हमने आपको इंटरनेट क्या है (Internet kya hai), इंटरनेट के प्रकार (Internet Ke Prakar), इंटरनेट के उपयोग (Internet Ke Upyog), इंटरनेट के फायदे (Internet Ke Fayade), इंटरनेट के नुकसान (Internet Ke Nukshaan), Intranet Kya hai, Extranet Kya Hai, भारत में इन्टरनेट कब आया आदि की पूरी जानकारी देने की कोशिश की है।

आशा करते है की आपको यह आर्टिकल इंटरनेट की खोज किसने की / Internet Ki Khoj Ki पसंद आया होगा। अगर आपको यह आर्टिकल ( इंटरनेट की खोज किसने की / Internet Ki Khoj Ki) पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्तों, रिश्तेदारों के साथ जरूर शेयर करे। साथ ही हमे कमेंट करके बताये की आपको आर्टिकल केसा लगा।

%d bloggers like this: